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Showing posts from August, 2020

क्या आपका प्यार आपका सोलमेट भी है ?

        अभी कुछ दिनों पहले ज़िंग टीवी चैनल पर एक कोरियन ड्रामा का प्रसारण शुरू हुआ है उसके कुछ एपिसोड्स देखे तो उसके किरदारों ने मुझे इतना प्रभावित किया कि हर अगला एपिसोड देखने का लालच छोड़ नही पाती और उसी ड्रामा को देखकर मुझे इस लेख को लिखने की प्रेरणा मिली।      ड्रामा चार बहुत ज़्यादा अमीर लड़कों जो कि गहरे दोस्त है और हमेशा साथ रहते है,जिनकी एक झलक पाने के लिये लड़कियां मरती है।लेकिन उनमें से दो दोस्तों को एक ऐसी लड़की से प्यार हो जाता है जिसके पापा एक ड्राइक्लीनर है।अब आप सोच रहे होंगे कि यकीनन लड़की बहुत ज़्यादा खूबसूरत होगी इसलिये दोनों दोस्त उसको दिल दे बैठे होंगे।लेकिन ऐसा बिल्कुल नही है लड़की दिखने में एकदम साधारण है, हाँ लेकिन उसमें कुछ ऐसी खूबियां है जो बाकी सब लड़कियों से उसे खास बनाती है।वह है उसका निडर व्यवहार जहां भी कुछ गलत होते देखती है उसका विरोध करती है चाहे उसके सामने कितने भी बड़े ओहदे का व्यक्ति क्यों न हो ,बहुत ज़्यादा मेहनती है कभी भी अपने आत्मसम्मान से समझौता नही करती,सबसे अच्छी खूबी जो  है वह हर परिस्थिति में तथा हर प...

राममंदिर,विद्यामन्दिर या अस्पताल

       (आज के समय की क्या है मांग ?) इस लेख के द्वारा मैं अपने व्यक्तिगत विचार प्रकट कर रही हूँ।किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मेरा कोई इरादा नही है। सदियों के इंतज़ार के बाद हज़ारों उतार-चढ़ाव देखने के बाद अयोध्या मामले में 5-8-2020 को राममंदिर के निर्माण का कार्य प्राम्भ किया गया जो निश्चित ही हिंदुओं के लिये काफी हर्ष का विषय है।लेकिन सदियों से हमसब ये भी पढ़ते ओर सुनते आए है की भगवान आडंबरो के नही सच्चे भाव के भूखे होते हैं।यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से कही से भी प्रभु से प्रार्थना करता है तो वह स्वीकार होती है।                    उदाहरण 1- श्रीराम ने शबरी के झूठे बेर खाए। 2- श्रीकृष्ण ने कौरवों के पास यथा संभव धनसंपदा होने पर भी पांडवो का साथ दिया। 3- श्रीकृष्ण ने सुदामा के दिल में अपने लिए सच्चा प्रेम देखकर ही उसके पास धन न होकर भी अपना मित्र कहने में गर्व की अनुभूति की। इन सब उदाहरणों से ये स्पष्ट होता है कि यदि भक्त की पुकार सच्ची हो तो प्रभु चाहे विशालकाय मन्दिर में हो या सड़क किना...