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क्या आपका प्यार आपका सोलमेट भी है ?

        अभी कुछ दिनों पहले ज़िंग टीवी चैनल पर एक कोरियन ड्रामा का प्रसारण शुरू हुआ है उसके कुछ एपिसोड्स देखे तो उसके किरदारों ने मुझे इतना प्रभावित किया कि हर अगला एपिसोड देखने का लालच छोड़ नही पाती और उसी ड्रामा को देखकर मुझे इस लेख को लिखने की प्रेरणा मिली।      ड्रामा चार बहुत ज़्यादा अमीर लड़कों जो कि गहरे दोस्त है और हमेशा साथ रहते है,जिनकी एक झलक पाने के लिये लड़कियां मरती है।लेकिन उनमें से दो दोस्तों को एक ऐसी लड़की से प्यार हो जाता है जिसके पापा एक ड्राइक्लीनर है।अब आप सोच रहे होंगे कि यकीनन लड़की बहुत ज़्यादा खूबसूरत होगी इसलिये दोनों दोस्त उसको दिल दे बैठे होंगे।लेकिन ऐसा बिल्कुल नही है लड़की दिखने में एकदम साधारण है, हाँ लेकिन उसमें कुछ ऐसी खूबियां है जो बाकी सब लड़कियों से उसे खास बनाती है।वह है उसका निडर व्यवहार जहां भी कुछ गलत होते देखती है उसका विरोध करती है चाहे उसके सामने कितने भी बड़े ओहदे का व्यक्ति क्यों न हो ,बहुत ज़्यादा मेहनती है कभी भी अपने आत्मसम्मान से समझौता नही करती,सबसे अच्छी खूबी जो  है वह हर परिस्थिति में तथा हर प...
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महिलाओं का जीवन कब बदलेगा।

महिला दिवस पर वॉट्सएप्प स्टेटस लगाने से अखबार में चंद महिलाओं की उपलब्धियों को छापने से हैप्पी वीमेन्स डे विश करने से मंच पर खड़े होकर महिलाओं की हक की बात करने से हर बार भयानक रेप कांड के बाद  कैंडल मार्च करने से इनसब से कुछ नही बदलेगा नही मिलेगा महिलाओं को सम्मान रोज होने वाली घटनाओं पर नही कसेगी कोई लगाम। सबसे पहले जब एक पुरूष एक महिला को भी उपभोग की वस्तु न समझ के उसे भी एक इंसान का दर्जा देगा उस दिन शायद कुछ बदलेगा जिस दिन रेप करने वालों को लंबे केस चलाने के बदले       सरेआम चौराहे पर फांसी पर लटकाया जायेगा  उस दिन शायद कुछ बदलेगा जब हर पति अपनी पत्नी से दिनभर तू करती क्या है कहने के बजाए थोड़ा सा आराम भी कर लिया कर कहेगा उस दिन शायद कुछ बदलेगा किसी तलाकशुदा महिला को देखकर जब  समाज ये कहेगा कि पति में ही कुछ कमी होगी उस दिन शायद कुछ बदलेगा जब हर पति मैरीकॉम के पति जैसे  घर और बच्चों की जिम्मेदारी उठाके अपनी पत्नी के सपनों को पंख देगा उस दिन शायद कुछ बदलेगा जिस दिन हर माता-पिता अपनी बेटी से कहेंगे तू तो हमारी अपनी है बेटा तो पराया हो जायगा उस दिन शाय...

माता-पिता बनने के बाद जीवन में बदलाव।

          मैंने अपने इस लेख में माता-पिता बनने के सफर को अपने शब्दों में बयान करने की कोशिश की है आशा है आप सब को भी अपना सफर याद आ जाये। चाहे किसी दम्पति की लव मैरिज हो या अरेंज मैरिज शादी के बाद उस लड़के और लड़की के न जाने कितने रिश्ते अपने आप बन जाते है।जैसे शादी होते ही लड़का लड़की से पति-पत्नी हो जाते हैं,लड़की बन जाती है बहु,चाची,भाबी,मासी,मामी और भी न जाने कितने रिश्तों के नाम जुड़ जाते हैं।ठीक उसी प्रकार लड़का भी बहुत सारे नामों से पुकारा जाता है,इतने सारे रिश्तों से जुड़ कर भी उनकी अपनी एक अलग जिंदगी होती है,जिसमें वो कभी लड़ते है झगड़ते है,रूठते है मनाते है,कभी बहस कर लेते है कभी बातचीत बंद कर देते है।लेकिन जिस दिन उन दोनों को पता चलता है कि कोई तीसरा अपना हमारे बीच आने वाला है या यूँ कहे जिस पल उनको पता चलता है कि वह दोनों पति-पत्नी से माता-पिता बनने वाले है उसी पल से उनकी ज़िंदगी बदल जाती है।जिस दम्पति को ये खुशी शादी के कुछ महीनों बाद मिल जाती है उनका तो नही पता लेकिन जिस दम्पति को शादी के बहुत सालों बाद ये खुशी मिलती है उनको तो इतनी ज़्य...

जिंदगी जब हिसाब करती है।

  जो व्यक्ति हमेशा दूसरों की परवाह करता है चाहे वो परवाह मानसिक,भावनात्मक, शारीरिक या आर्थिक किसी भी प्रकार की हो चाहे वह मदद बहुत छोटी सी हो या बड़ी  ऐसा  वह किसी लाभ पाने की आशा से नही करता बल्कि ऐसा करने से उसको आत्मिक शांति और आनंद महसूस होता है।वह देने के सुख को जानता है उस खुशी को वह हर बार जब भी किसी के लिये कछ करता है तो महसूस करता है इसलिये बार- बार  ऐसा  करने के लिये खुद से ही प्रेरित होता है।आपने बहुत बार पढ़ा या सुना होगा जो दोगे वो पाओगे,जो बोओगे वो काटोगे,जिंदगी में हम जो भी बाटते है वही बढ़कर हमे वापस मिलता है चाहे वह प्रेम हो,खुशी हो,सुख हो,सम्मान हो,दुख हो या फिर तिरिस्कर हो।कभी -कभी हम जनमुच्छ कर किसी का दिल दुखा देते है और कभी अनजाने में ही हम किसी के दुख का कारण बन जाते है।जिंदगी हर बात का हिसाब पूरा करती है।हाँ लेकिन एक बात गौर करने वाली ये है कि जरूरी नही की आपने जिसकी मदद आज की है वही आपके लिये तुरन्त कुछ करे या भविष्य में वही व्यक्ति आपके लिये कुछ करे या शायद न भी करे।आज आप जो भी करेंगे वो भविष्य में  चार गुना बढ़कर लौट के वापस आएगा जरूर...

सौंदर्य की परिभाषा

सुंदरता क्या है? किसी को बहती नदी बहुत सुंदर लगती है,किसी को खुला आसामान,किसी को बारिश,किसी को पहाड़िया तो किसी को जानवर  या पेड़-पौधे।ये तो हुई प्राकृतिक  वस्तुएँ अब बात करते है इंसानों की,हम सब अपने जीवन मे या यूँ कहे कि अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में पता नही कितने लोगों से मिलते ‌हैं,उठते हैं,बैठते हैं,बातें करते हैं उनके साथ काम करते हैं लेकिन प्रत्येक व्यक्ति हमको सुंदर नही लगता या अच्छा नही लगता।जिस प्रकार हर इंसान एक दूसरे से अलग होता है उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति में अपनी एक खूबसूरती होती है।जैसे कोई दिखने में सुंदर होगा,किसी का व्यवहार बोहत सुंदर होगा,किसी की लिखावट सुंदर होगी तो किसी की वाणी में मिठास होगी सब  में अलग अलग प्रकार की सुंदरता होती है।इसी प्रकार हर इंसान को हर इंसान पसन्द नही हो सकता। बहुत सारे गुण मिलके एक इंसान को संपूर्ण रूप से सुंदर बनाते है।       आज भी हमारे देश में किसी भी लड़की की सुंदरता को उसके बाकी सभी गुणों से ऊपर रखा जाता है।यदि कोई लड़की सिलाई,कड़ाई,बुनाई,अच्छा खाना बनाने,पढ़ने में होशियार है,बड़ो का हर कहा मानती है,घर के प्रत्ये...

पहचान

  तेरी नाराज़गी की हमेशा वही वजह रही है जिस काम को करने में मुझे खुशी मिली है। सालों से रिश्ता निभाने के खातिर तूने बातें कही और मैंने सुनी है। थक गई हूं अपना वजूद खोते-खोते  अपने टूटे सपनों का बोझ ढोते-ढोते। अब सब्र का बांध टूट चुका है दिल पे लगे ज़ख्म वक्त भर चुका है। अपने जब देते हैं दिल पे चोट उसके सामने फीकी लगती है  दुनिया की हर एक खोट। बेटी, पत्नी और माँ बनके बीता दिया अपना आधा जीवन अब पूरे करने है अपने दिल के छोटे-छोटे अरमान मैं भी बनाऊंगी अब खुद की एक पहचान।

राममंदिर,विद्यामन्दिर या अस्पताल

       (आज के समय की क्या है मांग ?) इस लेख के द्वारा मैं अपने व्यक्तिगत विचार प्रकट कर रही हूँ।किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मेरा कोई इरादा नही है। सदियों के इंतज़ार के बाद हज़ारों उतार-चढ़ाव देखने के बाद अयोध्या मामले में 5-8-2020 को राममंदिर के निर्माण का कार्य प्राम्भ किया गया जो निश्चित ही हिंदुओं के लिये काफी हर्ष का विषय है।लेकिन सदियों से हमसब ये भी पढ़ते ओर सुनते आए है की भगवान आडंबरो के नही सच्चे भाव के भूखे होते हैं।यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से कही से भी प्रभु से प्रार्थना करता है तो वह स्वीकार होती है।                    उदाहरण 1- श्रीराम ने शबरी के झूठे बेर खाए। 2- श्रीकृष्ण ने कौरवों के पास यथा संभव धनसंपदा होने पर भी पांडवो का साथ दिया। 3- श्रीकृष्ण ने सुदामा के दिल में अपने लिए सच्चा प्रेम देखकर ही उसके पास धन न होकर भी अपना मित्र कहने में गर्व की अनुभूति की। इन सब उदाहरणों से ये स्पष्ट होता है कि यदि भक्त की पुकार सच्ची हो तो प्रभु चाहे विशालकाय मन्दिर में हो या सड़क किना...

कोरोना के दौर में हमने क्या पाया और क्या खोया ।

आज कोरोना महामारी के कारण जो देश ओर दुनिया का हाल हो रहा है,ऐसा शायद ही कभी किसी ने सोचा होगा।जिन लोगों के पास पैसा है,साधन है और सुविधाएं है,वे सब उस दर्द का अंदाज़ा तक नहीं लगा सकते जिसे गरीब और मजदूर लोग सहने को मजबूर हैं।जिन लोगों में आज भी संवेदनाये मौजूद है ऐसा मुझे इसलिए कहना पड़ रहा है क्योंकि आज के दौर में लोगों की भावनाएं कंही मर सी गयी हैं।बस हर कोई सफल होना चाहता है,सबसे आगे निकलना चाहता है चाहे उसके लिये उसको कुछ भी क्यों न करना पड़े।लेकिन इस महामारी ने लोगों की सोई हुई इंसानियत को जगाया है साथ ही सब मनुष्य एक है तथा इंसान ही इंसान के काम आता है इस भवना को भी जागृत किया है।               दिल दर्द से फट जाता था जब देखते ओर सुनते थे कई गर्भवती महिलाएं,मासूम बच्चे,श्रमिक भाई नंगे पैर तपती धूप में हजारों किलोमीटर  का सफर तय करने निकले थे,बस इसी आस में कि किसी तरह बस अपने घर पहुंच जाएं।कई माताएं अपने दुधमुँहे बच्चे को गोद मे तथा सर पर सामान लाद कर चलने को मजबूर है।ओर इसी सफर को तय करते समय कई लोगों ने ट्रेन से कटकर तो कितनों की ट्रक के प...

शुशांत तुम क्यों चले गए ?

हाल ही में शुशांत की आखिरी फ़िल्म प्रदर्शित हुई है जिसमें उनके काम की सराहना की जा रही है।उन्होंने जितने भी किरदार निभाए पूरे दिल से और ईमानदारी से निभाए।वह अपने काम से बोहत प्यार करते थे इसलिए तो जो फिल्में उनकी किसी कारणवश नही चल पाई उनमें भी उनका काम हमेशा पसन्द किया गया।इस दुनिया से गये हुए उन्हें बहुत दिन हो चुके हैं लेकिन उनके चाहने वाले अभी तक इस सच्चाई को स्वीकार नही कर पाए हैं,आजकल टीवी पर लगातार उनकी फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है जिसे देखकर लगता है काश कहीं से भी कैसे भी वो वापस हमसब के बीच आ जाते।हमसब ने तो सिर्फ उन्हें टीवी पर देखा है तो हमलोगों का ऐसा हाल न जाने उनके परिवार वाले इस सदमे को कैसे बर्दाश्त कर रहें होंगे,भगवान उनके परिवार को इस सदमे से उबरने में मदद करे और शुशांत की आत्मा को शांति प्रदान करे।     शुशांत सिंह राजपूत इस दुनिया को छोड़कर दूसरी दुनिया मे जा चुके हैं,ओर छोड़ गए हैंअपने पीछे कई अनसुलझे सवाल।वह पिछले कुछ समय से डिप्रेशन का शिकार थे और उनका इलाज भी चल रहा था ओर इसमें कोई शक नही की यदि वे कुछ दिन धैर्य रखते,अपनी भावनाओं को अपने ऊपर हा...