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क्या आपका प्यार आपका सोलमेट भी है ?

        अभी कुछ दिनों पहले ज़िंग टीवी चैनल पर एक कोरियन ड्रामा का प्रसारण शुरू हुआ है उसके कुछ एपिसोड्स देखे तो उसके किरदारों ने मुझे इतना प्रभावित किया कि हर अगला एपिसोड देखने का लालच छोड़ नही पाती और उसी ड्रामा को देखकर मुझे इस लेख को लिखने की प्रेरणा मिली।      ड्रामा चार बहुत ज़्यादा अमीर लड़कों जो कि गहरे दोस्त है और हमेशा साथ रहते है,जिनकी एक झलक पाने के लिये लड़कियां मरती है।लेकिन उनमें से दो दोस्तों को एक ऐसी लड़की से प्यार हो जाता है जिसके पापा एक ड्राइक्लीनर है।अब आप सोच रहे होंगे कि यकीनन लड़की बहुत ज़्यादा खूबसूरत होगी इसलिये दोनों दोस्त उसको दिल दे बैठे होंगे।लेकिन ऐसा बिल्कुल नही है लड़की दिखने में एकदम साधारण है, हाँ लेकिन उसमें कुछ ऐसी खूबियां है जो बाकी सब लड़कियों से उसे खास बनाती है।वह है उसका निडर व्यवहार जहां भी कुछ गलत होते देखती है उसका विरोध करती है चाहे उसके सामने कितने भी बड़े ओहदे का व्यक्ति क्यों न हो ,बहुत ज़्यादा मेहनती है कभी भी अपने आत्मसम्मान से समझौता नही करती,सबसे अच्छी खूबी जो  है वह हर परिस्थिति में तथा हर प...

शुशांत तुम क्यों चले गए ?

हाल ही में शुशांत की आखिरी फ़िल्म प्रदर्शित हुई है जिसमें उनके काम की सराहना की जा रही है।उन्होंने जितने भी किरदार निभाए पूरे दिल से और ईमानदारी से निभाए।वह अपने काम से बोहत प्यार करते थे इसलिए तो जो फिल्में उनकी किसी कारणवश नही चल पाई उनमें भी उनका काम हमेशा पसन्द किया गया।इस दुनिया से गये हुए उन्हें बहुत दिन हो चुके हैं लेकिन उनके चाहने वाले अभी तक इस सच्चाई को स्वीकार नही कर पाए हैं,आजकल टीवी पर लगातार उनकी फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है जिसे देखकर लगता है काश कहीं से भी कैसे भी वो वापस हमसब के बीच आ जाते।हमसब ने तो सिर्फ उन्हें टीवी पर देखा है तो हमलोगों का ऐसा हाल न जाने उनके परिवार वाले इस सदमे को कैसे बर्दाश्त कर रहें होंगे,भगवान उनके परिवार को इस सदमे से उबरने में मदद करे और शुशांत की आत्मा को शांति प्रदान करे।
  

 शुशांत सिंह राजपूत इस दुनिया को छोड़कर दूसरी दुनिया मे जा चुके हैं,ओर छोड़ गए हैंअपने पीछे कई अनसुलझे सवाल।वह पिछले कुछ समय से डिप्रेशन का शिकार थे और उनका इलाज भी चल रहा था ओर इसमें कोई शक नही की यदि वे कुछ दिन धैर्य रखते,अपनी भावनाओं को अपने ऊपर हावी न होने देते तो कुछ दिन,हफ्ते या महीनों के बाद वो बिल्कुल स्वस्थ हो जाते।तब शायद ये स्पष्ट हो पाता कि उनके साथ सच में क्या- क्या हो रहा है और बॉलीवुड में किन लोगों द्वारा उनके साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है।वह चाहते तो उन लोगों के खिलाफ सच सामने लाने का प्रयास करते तो उनको तरह- तरह की धमकियां मिलती ओर किसी का सप्पोर्ट भी नही मिलता लेकिन हो सकता है जैसे उनकी मौत के बात बहुत सारे बॉलीवुड से जुड़े लोग सामने आ रहे है और अपनी- अपनी आपबीती बता रहे हैं उसी प्रकार अगर उनकी बात सच ओर सही होती तो देर से ही सही धीरे- धीरे उनको बाकी लोगों का साथ मिलता जाता ओर जहां एकता होती है वहाँ जीतना पक्का है।हां ये हो सकता था उसमें वक्त थोड़ा ज़्यादा लगता,लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती,उनको कुछ सालों तक बॉलीवुड में काम नही मिलता लेकिन सच तो सामने आ पाता साथ ही उनको खुद को सिर्फ एक बॉलीवुड एक्टर के तौर पे नहीं देखना चाहिए था बल्कि उनको समझना चाहिये था कि वो एक बेहतरीन कलाकार है और अपनी कला को देखाने का आज के युग में अनेक माध्यम मौजूद है जिसमें से किसी भी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके वह अपनी कला का प्रदर्शन कर सकते थे।उनके जाने के बाद कोई कुछ भी कहे,किसी पर भी आरोप लगाए जाएं।ऐसा करने से जो इंसान इस दुनिया से जा चुका है वह हमसब के बीच वापस नहीं आ सकता।
                    कोई यूँही अचानक से पांच मिनट में आत्महत्या का फैसला नही करता, बहुत दिनों पहले से ऐसे विचार मरने वाले के दिमाग मे चल रहे होते हैं,जिनका पता उनकी बातचीत में प्रयोग किये जाने वालें शब्दों तथा भावों से पता चलता है।ऐसे लोग ज्यादातर जीवन के प्रति उदासिन हो जाते है,नकारत्मक शब्दों का प्रयोग करते हैं,खुद में खोए - खोए रहते हैं आदि।परंतु शुशांत युवा,प्रतिभाशाली ओर मेहनती थे।उन्होंने अपनी फिल्मों में दमदार अभिनय क्षमता की बदौलत एक अच्छा मुकाम हासिल किया था,कई लोग तो उनके अभिनय के तब से कायल है जब वह फिल्मस्टार न होके पवित्र रिश्ता सीरियल में मानव का किरदार निभाया करते थे,उसमें जब भी वह कोई भावुक सीन करते थे ज्यादातर महिलाओं के आँखे नम हो जाया करती थी।शुशांत ने अपनी आखिरी फ़िल्म छिछोरे में भी यही संदेश जनता को दिया था की हमारी जिंदगी से बढ़कर कुछ नहीं होता,फिर भी उन्होंने खुद ऐसा कदम क्यो उठाया ये समझ पाना वाकई बहुत मुश्किल है।हमसब के जीवन में बहुत सारे लोग होते हैं जिनसे रोज़ हमारा सामना होता है लेकिन प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कुछ गिने- चुने लोग ही होते है जिनसे व्यक्ति अपने दिल का हाल बयान करता है और वही लोग जान पाते है कि कब वह व्यक्ति सच में खुशी से हँस रहा है और कब वह अपनी हंसी के पीछे कोई अनकहा दर्द छुपा रहा है।शायद शुशांत ने सफलता पाने के सफर में ऐसे लोगों को खो दिया था ओर उनको इस बात का जबतक एहसास हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी ओर वह दिखावटी,मतलबी ओर चापलूस लोगो से घिर चूके थे जहां वह अपने दिल का हाल चाह कर भी किसी से बाँट नही पाए और उस बोझ को सह नहीं पाए और उन्होंने उससे छुटकारा पाने के लिये अपने जीवन को ही समाप्त कर डाला।
          इसलिये मुझे लगता है कि जीवन में जितना जरूरी सफलता पाना है उससे कई जरूरी है कि आपके पास कुछ ऐसे सच्चे रिश्ते हो जो आपको हर परिस्थिति में समझ पाए ओर आपका साथ निभा सके।अन्यथा व्यक्ति सफल तो हो जाता है लेकिन एक मुकाम पे पहुंच कर खुद को बहुत ही तन्हा महसूस करता है।ओर जीवन का एक सत्य ये भी है इंसान को जितना असफलताएं नहीँ तोड़तीं उससे कहीं ज़्यादा उसको अकेलापन अंदर से तोड़ देता है।

जहाँ अच्छे और सच्चे रिश्ते निवास करते है वहाँ सफलता खुद चली आती है ओर लंबे समय तक टिकी रहती है

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जिंदगी जब हिसाब करती है।

  जो व्यक्ति हमेशा दूसरों की परवाह करता है चाहे वो परवाह मानसिक,भावनात्मक, शारीरिक या आर्थिक किसी भी प्रकार की हो चाहे वह मदद बहुत छोटी सी हो या बड़ी  ऐसा  वह किसी लाभ पाने की आशा से नही करता बल्कि ऐसा करने से उसको आत्मिक शांति और आनंद महसूस होता है।वह देने के सुख को जानता है उस खुशी को वह हर बार जब भी किसी के लिये कछ करता है तो महसूस करता है इसलिये बार- बार  ऐसा  करने के लिये खुद से ही प्रेरित होता है।आपने बहुत बार पढ़ा या सुना होगा जो दोगे वो पाओगे,जो बोओगे वो काटोगे,जिंदगी में हम जो भी बाटते है वही बढ़कर हमे वापस मिलता है चाहे वह प्रेम हो,खुशी हो,सुख हो,सम्मान हो,दुख हो या फिर तिरिस्कर हो।कभी -कभी हम जनमुच्छ कर किसी का दिल दुखा देते है और कभी अनजाने में ही हम किसी के दुख का कारण बन जाते है।जिंदगी हर बात का हिसाब पूरा करती है।हाँ लेकिन एक बात गौर करने वाली ये है कि जरूरी नही की आपने जिसकी मदद आज की है वही आपके लिये तुरन्त कुछ करे या भविष्य में वही व्यक्ति आपके लिये कुछ करे या शायद न भी करे।आज आप जो भी करेंगे वो भविष्य में  चार गुना बढ़कर लौट के वापस आएगा जरूर...