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क्या आपका प्यार आपका सोलमेट भी है ?

        अभी कुछ दिनों पहले ज़िंग टीवी चैनल पर एक कोरियन ड्रामा का प्रसारण शुरू हुआ है उसके कुछ एपिसोड्स देखे तो उसके किरदारों ने मुझे इतना प्रभावित किया कि हर अगला एपिसोड देखने का लालच छोड़ नही पाती और उसी ड्रामा को देखकर मुझे इस लेख को लिखने की प्रेरणा मिली।      ड्रामा चार बहुत ज़्यादा अमीर लड़कों जो कि गहरे दोस्त है और हमेशा साथ रहते है,जिनकी एक झलक पाने के लिये लड़कियां मरती है।लेकिन उनमें से दो दोस्तों को एक ऐसी लड़की से प्यार हो जाता है जिसके पापा एक ड्राइक्लीनर है।अब आप सोच रहे होंगे कि यकीनन लड़की बहुत ज़्यादा खूबसूरत होगी इसलिये दोनों दोस्त उसको दिल दे बैठे होंगे।लेकिन ऐसा बिल्कुल नही है लड़की दिखने में एकदम साधारण है, हाँ लेकिन उसमें कुछ ऐसी खूबियां है जो बाकी सब लड़कियों से उसे खास बनाती है।वह है उसका निडर व्यवहार जहां भी कुछ गलत होते देखती है उसका विरोध करती है चाहे उसके सामने कितने भी बड़े ओहदे का व्यक्ति क्यों न हो ,बहुत ज़्यादा मेहनती है कभी भी अपने आत्मसम्मान से समझौता नही करती,सबसे अच्छी खूबी जो  है वह हर परिस्थिति में तथा हर प...

कोरोना के दौर में हमने क्या पाया और क्या खोया ।

आज कोरोना महामारी के कारण जो देश ओर दुनिया का हाल हो रहा है,ऐसा शायद ही कभी किसी ने सोचा होगा।जिन लोगों के पास पैसा है,साधन है और सुविधाएं है,वे सब उस दर्द का अंदाज़ा तक नहीं लगा सकते जिसे गरीब और मजदूर लोग सहने को मजबूर हैं।जिन लोगों में आज भी संवेदनाये मौजूद है ऐसा मुझे इसलिए कहना पड़ रहा है क्योंकि आज के दौर में लोगों की भावनाएं कंही मर सी गयी हैं।बस हर कोई सफल होना चाहता है,सबसे आगे निकलना चाहता है चाहे उसके लिये उसको कुछ भी क्यों न करना पड़े।लेकिन इस महामारी ने लोगों की सोई हुई इंसानियत को जगाया है साथ ही सब मनुष्य एक है तथा इंसान ही इंसान के काम आता है इस भवना को भी जागृत किया है।
            


 दिल दर्द से फट जाता था जब देखते ओर सुनते थे कई गर्भवती महिलाएं,मासूम बच्चे,श्रमिक भाई नंगे पैर तपती धूप में हजारों किलोमीटर  का सफर तय करने निकले थे,बस इसी आस में कि किसी तरह बस अपने घर पहुंच जाएं।कई माताएं अपने दुधमुँहे बच्चे को गोद मे तथा सर पर सामान लाद कर चलने को मजबूर है।ओर इसी सफर को तय करते समय कई लोगों ने ट्रेन से कटकर तो कितनों की ट्रक के पलटने से मौत हो चुकी है,कितने बच्चे अनाथ हो चुके है तब जाकर सरकारों की आंखे खुली ओर ट्रेनों तथा बसों का इंतजाम किया गया ओर उन ट्रेनों में भी कितने घण्टों बाद पानी तथा खाने की व्यवस्था हो पाती थी,कई महिलाओं ने उन ट्रेनों के शौचालय में तो कइयों ने सड़क किनारे अपने बच्चों को पैदा किया।सरकारी आंकड़ा तो कम ही बताता है लेकिन असल में न जाने कितने लोगों ने श्रमिक ट्रेनों में,पैदल चलकर सफर करने वालों ने ओर बसों से घर पहुंचने के सफर में जान गवाई ,उनकी जान कोरोना ने नही बल्कि भूक,प्यास,थकान ओर लाचारी ने ली।लॉकडाउन के कारण कई परिवार एक दो महीनों से पानी और बिसकिट्स खाके जीने को मजबूर थे।एक पिता अपनी दो मासूम बेटियों को कांवर बना के कंधे पर ढो कर मिलों का सफर तय करने निकला है।ये सब ऐसे लोग है जो रोज कमाते है और रोज खाते है,आने वाले कल की चिंता का बोझ अपने सर पर नही डालते सिर्फ आज में खुश रहते हैं। लेकिन इस संकटकाल ने इनके माथे पर भी चिंता की लकीरें खिंच दी हैं।कोरोना इनको संक्रमित करे या न करे,किन्तु भूख ओर बेरोज़गारी इनको रोज़ मार रही है।
     लॉक डाउन लगातार तीन बार हुआ।जिनके पास धन था और सरकारी नौकरी उन्होंने तो आसानी से घर में दिन बीता दिए लेकिन जो लोग फुटपाथ पे सोते थे,भीख मांगते थे,चाय के ठेले,गुपचुप के ठेले,इस्त्री वाले,बूट पॉलिश वाले ओर न जाने ऐसे कितने छोटे छोटे काम करके अपना पेट भरने वालों ने कैसे ये दिन  काटे होंगे।जिनको पेट भर तीनों समय अपनी पसंद का खाना मिलता हो वो भूखे रहना किसे कहते हैं नही जान सकते।जो रोज़ दो तीन हज़ार खाने पीने में उड़ा देते हो वो ये नही समझ सकते कि तीन हज़ार में किसी गरीब का महीने भर का खर्चा कैसे चलता है।ऐसे लोगों के लिये ये तीन महीने तीन सालों के बराबर कटे होंगे।इस महामारी ने सबको केवल मानव का दर्जा दिला दिया क्योंकि कोरोना किसी को भी हो सकता है चाहे वो अमीर हो या गरीब,किसी भी जाति या धर्म का हो,किसी भी आयु का हो,कोई बोहत बड़ी हस्ती हो या कोई मामूली सा नागरिक बीमारी कीसी को भी कभी भी हो सकती है।पूरी दुनिया मे न जाने कितने लोगों ने दम तोड़ दिया है और न जाने कितने ओर लोग दम तोड़ेंगे।इतने बुरे समय में भी दूध,राशन सब्जी ओर दवाईयों का हम नियमीत तोर पर इस्तेमाल कर पाए।इन सब वस्तुओं को हम तक पहुंचाने वाले लोगों का जितना धन्यवाद किया जाए कम है।ओर एक जो हमारे लिये हमेशा उपलब्ध रहे वह है सफाईकर्मी जिनके नही आने से हम घर में रहते हुए कैसा महसूस करते आप सब खुद समझ सकते हैं।जिस प्रकार इस पृथ्वी पर मौजूद हर वस्तु या जीव की अपनी - अपनी उपयोगिता ओर अस्तित्व है उसी प्रकार ये कोरोना बीमारी भी हमारे लिये कुछ अच्छे तथा बुरे अनुभव लेकर आई है।

                  कोरोना के अनुभव

अच्छे अनुभव - 😊😊😊😊

1)  रोज़ की भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ पल अपने        लिये मिले हैं।

2)  कोरोना काल ने सबको समझाया है कि  सब            मनुष्य एक समान है चाहे वह कोई  सेलेब्रिटीज़          हो या कोई आम नागरिक बीमारी कहि भी                किसी को भी हो सकती है।

3)   जो भी व्यक्ति अपनी नौकरी और  व्यपार के             कारण परिवार के साथ समय नही बिता पाते थे         अब अपना पूरा समय परिवार को दे रहें हैं।

4)    शादी समाराहों में जो फ़िजूल खर्ची ओर शोर            हुआ करता था उसमें काफी कमी आयी है।

5)    आज की मतलबी दुनिया में लोगों के दिलों में            दया,करुणा ओर सेवा का भाव जगाया है।

6)    जातिवाद और धार्मिक भेदभाव को कम किया          है।

7)    बेरोजगार ओर गरीबों की हालत देखकर अमीर         और सुविधा संपन्न लोगों को भी भूख और रोटी         की किमत समझ आई है।

8)   सफाई कर्मी,पुलिस,डॉक्टरर्स ,नर्सेज,बाकी              अस्पताल कर्मी और दवाई दुकानें  अपना घर            परिवार छोड़ के कैसे हरपल हमसब की सेवा में        उपस्थित रहते है इसका एहसास कराया।

9)   बार-बार हाथ धोना कितना जरूरी है ये समझ           में आया।

10)  एक ग्रहणी कैसे चौबीस घण्टे घर के प्रत्येक              सदस्य की सेवा में उपलब्ध रहती है इसको              परिवार के बाकी सदस्यों को समझने का                  अवसर मिला हाँ लेकिन इसको वही समझ               पाए जो समझना चाहते थे जिनके लिये                   उनकी  पत्नी और मां भी अहम है।

             बुरे अनुभव-😢😢😢😢

1)    वैसे तो भारत में हर छोटी- छोटी बात में  हर             जगह भीड़ जमा हो जाती हैं लेकिन इस                   कोरोना काल  में बीमारी होने के डर से लोगों ने         जरूरी होने पर भी दूसरों की मदद नहीँ की।

2)    सामाजिक मेल मिलाप नहीं करने हैं जितना             अकेले अपने घर पर रहोगे उतना बीमारी से दूर          रहोगे।

3)   एक तो कोरोना महामारी इस साल सबके लिए          परेशानी का सबब बन चुकी थी और साथ ही            और भी कई सारी प्राकृतिक आपदाएं भी आई           साथ ही चीन से युद्ध की स्थिति बनती नज़र आ         रही है।

4)    स्कूल कॉलेज के एग्जाम नही हो पाए तथा               बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई  करने के चक्कर में         खेलना कूदना छोड़ कर दिनभर मोबाइल और           लैपटॉप में बैठना पड़ रहा है।

5)    धार्मिक स्थल,पार्क,गार्डन मॉल  इतना समय              होने के बावजूद कहि जा नही सकते।

6)     कुछ महीनों में ही तलाक के मामले बोहत हद           तक बढ़ गए इसका कारण छोटा है लेकिन               उतना ही आशचर्ये में डालने वाला भी है , ये             तलाक सिर्फ इसलिए हो रहे है क्योंकि लॉक             डाऊन के कारण पति पत्नी ज्यादा समय एक           दूसरे के साथ बिता रहे हैं।

7)    जहां भी जाओ आपको मास्क पहनना                   अनिवार्य है।

8)   गृहणियों को मुश्किल से जो गर्मी छुट्टी में अपने        मायके जाके कुछ दिन का आराम मिलता था वो        भी नही मिला तथा बच्चों और पति के घर पर          रहने से ओर काम बड़ गया।

9)  आम सर्दी,खांसी और बुखार होने पर भी कोरोना        होने की शंका होना।

10)  आफिस ओर स्कूलों के बंद होने पर भी परिवार          सहित कहि घूमने नही जा सकते इसलिये  सब          बोरियत का भी शिकार हो रहें हैं।

 और भी कई छोटे बड़े बदलाव आए है हमारी दैनिक   जीवन में जो हर किसी ने अपने-अपने स्तर पर         महसूस किए होंगे। पूरी दुनिया के डॉक्टर इस बीमारी की दवाई बनाने में लगे हैं ना जाने वो कब बनेगी ओर बन भी गयी तो आम नागरिक तक पहुंचने में पता नही कितना वक्त लगेगा।इसलिए बार-बार कोरोना को को कोसने से कोई हल नही निकलेगा।अगले छह महीने या पूरा साल भी ऐसे ही हालात में बीत सकता है।प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह किसी भी स्तर का हो कुछ काम करे या न करे पेट तो खाना मांगता है और लगातार खाने की पूर्ति करने के लिये लगातार कमाना जरूरी है,जो हर प्रकार के व्यक्ति के लिये घर पर बैठकर करना सम्भव नही है इसलिये घर से बाहर तो निकलना ही पड़ेगा बस जितना हो सके सतर्क ओर सजग रहना है।यू कहे कि जिंदगी तो जीनी है लेकिन इस बीमारी के साथ जंग भी लड़नी है और उसे हराना भी है।इस संकटकाल में अपने स्तर पर जितना हो सके दूसरों की मदद करने की कोशिश करे,जरूरी नही ये मदद आर्थिक ही हो,भ्रमकुमारी की शिवानी दीदी कहती है अगर आप किसी को कुछ दे सकते हैं तो अच्छी बात है लेकिन यदि नहीं दे सकते तो सिर्फ अपने भावनाओं को अच्छा बना लीजिए ,अपने आस -पास के लोगों,परिवार,रिश्तेदार,मित्रों,आपके जानने वाले और न जानने वाले,देश-विदेश तथा पूरी दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति के लिये हमेशा ये सोचें कि सब खुश रहे,स्वस्थ रहें,सुखी रहें तथा सफल हो।ये भी  एक प्रकार की मानव सेवा है।करके देखिए अच्छा लगेगा।
 

Comments

  1. Aj ki sthiti ka sajiv varnan padh kar bahut achha laga.-VANDANA

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  2. सच में हम सब ने को महसूस किया है... वही आपने लिखा है । धन्यवाद।

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    Replies
    1. आपका भी ध्न्यवाद।

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