अभी कुछ दिनों पहले ज़िंग टीवी चैनल पर एक कोरियन ड्रामा का प्रसारण शुरू हुआ है उसके कुछ एपिसोड्स देखे तो उसके किरदारों ने मुझे इतना प्रभावित किया कि हर अगला एपिसोड देखने का लालच छोड़ नही पाती और उसी ड्रामा को देखकर मुझे इस लेख को लिखने की प्रेरणा मिली। ड्रामा चार बहुत ज़्यादा अमीर लड़कों जो कि गहरे दोस्त है और हमेशा साथ रहते है,जिनकी एक झलक पाने के लिये लड़कियां मरती है।लेकिन उनमें से दो दोस्तों को एक ऐसी लड़की से प्यार हो जाता है जिसके पापा एक ड्राइक्लीनर है।अब आप सोच रहे होंगे कि यकीनन लड़की बहुत ज़्यादा खूबसूरत होगी इसलिये दोनों दोस्त उसको दिल दे बैठे होंगे।लेकिन ऐसा बिल्कुल नही है लड़की दिखने में एकदम साधारण है, हाँ लेकिन उसमें कुछ ऐसी खूबियां है जो बाकी सब लड़कियों से उसे खास बनाती है।वह है उसका निडर व्यवहार जहां भी कुछ गलत होते देखती है उसका विरोध करती है चाहे उसके सामने कितने भी बड़े ओहदे का व्यक्ति क्यों न हो ,बहुत ज़्यादा मेहनती है कभी भी अपने आत्मसम्मान से समझौता नही करती,सबसे अच्छी खूबी जो है वह हर परिस्थिति में तथा हर प...
(आज के समय की क्या है मांग ?)
इस लेख के द्वारा मैं अपने व्यक्तिगत विचार प्रकट कर रही हूँ।किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मेरा कोई इरादा नही है।
सदियों के इंतज़ार के बाद हज़ारों उतार-चढ़ाव देखने के बाद अयोध्या मामले में 5-8-2020 को राममंदिर के निर्माण का कार्य प्राम्भ किया गया जो निश्चित ही हिंदुओं के लिये काफी हर्ष का विषय है।लेकिन सदियों से हमसब ये भी पढ़ते ओर सुनते आए है की भगवान आडंबरो के नही सच्चे भाव के भूखे होते हैं।यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से कही से भी प्रभु से प्रार्थना करता है तो वह स्वीकार होती है।
उदाहरण
1- श्रीराम ने शबरी के झूठे बेर खाए।
2- श्रीकृष्ण ने कौरवों के पास यथा संभव धनसंपदा होने पर भी पांडवो का साथ दिया।
3- श्रीकृष्ण ने सुदामा के दिल में अपने लिए सच्चा प्रेम देखकर ही उसके पास धन न होकर भी अपना मित्र कहने में गर्व की अनुभूति की।
इन सब उदाहरणों से ये स्पष्ट होता है कि यदि भक्त की पुकार सच्ची हो तो प्रभु चाहे विशालकाय मन्दिर में हो या सड़क किनारे किसी पत्थर में उसकी पुकार प्रभु तक पहुंच ही जाती है।जितने बड़े मन्दिर होते है उसके बाहर बैठने वाले गरीबों की संख्या उतनी ही ज्यादा होती है।उनके मन में केवल यही भावना होती है कि मन्दिरों में इतने बड़े-बड़े व्यापारी कितना दान करते हैं तो शायद हमे भी कुछ मिल जाए और हम मांग- मांग कर अच्छे से अपना जीवन यापन कर सके।
2- श्रीकृष्ण ने कौरवों के पास यथा संभव धनसंपदा होने पर भी पांडवो का साथ दिया।
3- श्रीकृष्ण ने सुदामा के दिल में अपने लिए सच्चा प्रेम देखकर ही उसके पास धन न होकर भी अपना मित्र कहने में गर्व की अनुभूति की।
इन सब उदाहरणों से ये स्पष्ट होता है कि यदि भक्त की पुकार सच्ची हो तो प्रभु चाहे विशालकाय मन्दिर में हो या सड़क किनारे किसी पत्थर में उसकी पुकार प्रभु तक पहुंच ही जाती है।जितने बड़े मन्दिर होते है उसके बाहर बैठने वाले गरीबों की संख्या उतनी ही ज्यादा होती है।उनके मन में केवल यही भावना होती है कि मन्दिरों में इतने बड़े-बड़े व्यापारी कितना दान करते हैं तो शायद हमे भी कुछ मिल जाए और हम मांग- मांग कर अच्छे से अपना जीवन यापन कर सके।
किन्तु यदि आज भीमराव अंबेडकर जी या डॉ ए .पी .जे अब्दुल कलाम जी से पूछा जाता कि वह एक विशालकाय मन्दिर के स्थान पर क्या बनवाना पसन्द करते तो मैं पूरे 100% यकीन के साथ कह सकती हूं कि वह मन्दिर के स्थान पर एक विद्या का मंदिर फिर भले ही वह विद्यालय,महाविद्यालय अथवा विश्वविद्यालय कुछ भी हो सकता है को बनवाने को तरजीह देते।क्योंकि एक मंदिर बनने से हजारों भिखारी पैदा होते है किंतु एक विद्यालय का निर्माण करने से हज़ारों विद्वान पैदा होते हैं तथा वह आगे चलकर ओर हज़ारों में शिक्षा का प्रसार करते हैं। शिक्षा एक व्यक्ति के जीवन को किस प्रकार रोशन करती है ये आप सब भली भांति जानते हैं।
अब बात करती हूं अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण ऐसे समय में किया जा रहा है जब देश और दुनिया में कोरोना महामारी के कारण हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है।ऐसे में भारत जैसे देश में जहाँ करोड़ो में आबादी है और प्रतिदिन कोरोना और भयावह रूप लेते जा रहा है,वहाँ एक विशालकाय मन्दिर का निर्माण करवाना आवश्यक है या अस्पताल का बनवाना ये सब आप खुद समझ सकते हैं।इस समय देश में ज़्यादा से ज़्यादा कोरोना टैस्टिंग सेंटरों का बढ़ना तथा कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए अस्पतालों का होना अति आवश्यक है।मन्दिर का निर्माण कुछ समय बाद भी करवाया जाता तो कोई फर्क नही पड़ता क्योंकि समय की मांग अभी कुछ और ही है।आप खुद विचारमंथन कीजिए और अंतरात्मा से सवाल कर्क इसका उत्तर खोजिए।



This comment has been removed by a blog administrator.
ReplyDeleteVery nice - Vandana
ReplyDeletethanku
Deleteमैं आपसे पूरी तरह सहमत हूं।
ReplyDeleteरामभक्त नहीं मोदीभक्त पैदा किये जा रहे है।
mujhe bhi yhi lgta hai
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