जो व्यक्ति हमेशा दूसरों की परवाह करता है चाहे वो परवाह मानसिक,भावनात्मक, शारीरिक या आर्थिक किसी भी प्रकार की हो चाहे वह मदद बहुत छोटी सी हो या बड़ी ऐसा वह किसी लाभ पाने की आशा से नही करता बल्कि ऐसा करने से उसको आत्मिक शांति और आनंद महसूस होता है।वह देने के सुख को जानता है उस खुशी को वह हर बार जब भी किसी के लिये कछ करता है तो महसूस करता है इसलिये बार- बार ऐसा करने के लिये खुद से ही प्रेरित होता है।आपने बहुत बार पढ़ा या सुना होगा जो दोगे वो पाओगे,जो बोओगे वो काटोगे,जिंदगी में हम जो भी बाटते है वही बढ़कर हमे वापस मिलता है चाहे वह प्रेम हो,खुशी हो,सुख हो,सम्मान हो,दुख हो या फिर तिरिस्कर हो।कभी -कभी हम जनमुच्छ कर किसी का दिल दुखा देते है और कभी अनजाने में ही हम किसी के दुख का कारण बन जाते है।जिंदगी हर बात का हिसाब पूरा करती है।हाँ लेकिन एक बात गौर करने वाली ये है कि जरूरी नही की आपने जिसकी मदद आज की है वही आपके लिये तुरन्त कुछ करे या भविष्य में वही व्यक्ति आपके लिये कुछ करे या शायद न भी करे।आज आप जो भी करेंगे वो भविष्य में चार गुना बढ़कर लौट के वापस आएगा जरूर लेकिन कितने वक्त के बाद या किसके कारण या यूँ कहे कि किस व्यक्ति के माध्यम से आएगा ये कोई नही जान सकता।इसको आप कहानियों की मदद से अच्छी तरीके से समझ पाएंगे।
कहानी -1
कहानी -2
जिस व्यक्ति ने कभी किसी और के लिये कुछ किया न हो या यूँ कहा जाए कि जो व्यक्ति हमेशा अपने लिये जिया हो वह कभी भी देने का सुख या किसी के लिये कुछ करने से जो आनंद प्राप्त होता है उसको कभी भी अनुभव नही कर सकता। ऐसे व्यक्ति की जिंदगी हमेशा मैं, मेरा ओर मुझे के आसपास ही केंद्रित रहती है।ऐसा नही है कि जो व्यक्ति हमेशा दूसरों के लिये अच्छा करते है उनके जीवन में कभी परेशानियां नही आती लेकिन उनको हल करने का रास्ता भी खुद ही निकल आता है।ऐसा मैं अपने खुद के अनुभव से कह रही हूं,मैंने बचपन से ही कभी किसी से ऐसी बात या शब्द कहने से परहेज़ किया है जिससे किसी का दिल दुखे,हमेशा यही कोशिश करती हूं कि मुझसे बात करके प्रत्येक व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान ही आये।इसलिए मेरे जीवन मे भी बहुत उतार चढ़ाव आये लेकिन हर मुश्किल अपने आप सुलझती भी गयी,ठीक उसी प्रकार यदि आपने कभी किसी का कभी दिल दुखाया होगा और आपके कारण उसकी आँखों से पानी छलका होगा और यदि वह व्यक्ति आपके कारण मानो एक साल दुखी रहा होगा तो यकीनन भविष्य में हो सकता है किसी और कि वजह से आप पाँच साल तक दुखी रहें।जिंदगी सुख-दुख हर चीज़ का हिसाब अपने तरीके से कभी न कभी करती जरूर है,इसलिए हमेशा कोशिश कीजिये अपनी तरफ से हमेशा दूसरों के लिये अच्छा सोचिए और अच्छा करिए।


Bht badiya
ReplyDeleteAchhe vichar hi achhe shabd ban kar ubharte hai very nice
ReplyDeleteThanks aapka nam likhte to or achcha hota
Deleteबहुत बढ़िया लिखी है आप , मै इसे लास्ट तक बिना रुके पढ़ता चला गया , सच मे आपकी सोच बहुत अलग है ।
ReplyDeleteधन्यवाद।
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